
सब कुछ तुम मन को ही जानो, जैसा सोचोगे तुम वैसे ही बन जाओगे
इसका मतलब ये नहीं दोस्तों कि जो भी तुम इच्छा करोगे वो ही पाओगे
जैसे रखोगे तुम्हारे विचार, वैसे ही बनेंगे तुम्हारे कर्म
तुम्हारे यही कर्म बनाते हैं तुम्हारी आदतें और आदतें करती हैं चरित्र निर्माण
और तुम्हरा यही चरित्र करता है तय तुम्हारे जीवन की दिशा प्यारे
इसीलिए तो मैं तुमसे कहता हूँ मेरे दोस्तों
अगर तुम अपने मन को सही दिशा दोगे तो
जीवन भी तुम्हारा सही दिशा में आगे बढ़ता जाएगा
अगर समय बीत गया तो फिर तुम कुछ भी नहीं कर पाओगे
सब कुछ तुम मन को ही जानो, जैसा सोचोगे तुम वैसे ही बन जाओगे
जो भी हम बाहरी जीवन में करते हैं वो होता है
अंदर चल रही मानसिक प्रक्रियाओं का प्रतिबिंब
जो भी तुम देखते, सुनते, समझते और अनुभव करते हो
उसका पड़ता है हमारे विचारों पर गहरा प्रभाव
और ये तुम्हारे विचार कर देते हैं तुम्हारे निर्णय प्रभावित
बाहर निकलो भय, ईर्ष्या, क्रोध और निराशा के विचारों से
नहीं तो ज़िन्दगी तुम्हारी बर्बाद हो जाएगी और तुम पछताओगे
सब कुछ तुम मन को ही जानो, जैसा सोचोगे तुम वैसे ही बन जाओगे




