आजकल मुझको रात और दिन लगी रहती है तेरी प्रेम धुन

Posted by

आजकल मुझको रात और दिन लगी रहती है तेरी प्रेम धुन

प्रेम की बंसी मैं बजाना चाहता हूँ नदियाँ किनारे

मेरा ये बेताब दिल हरदम बस तुझको ही पुकारे

सुन लो मेरी बहकती साँसों की पुकार तुम

कर लो चाहे थोड़ा सा ही सही प्यार तुम

अगर तुम एक बार छू लो मेरी धड़कनों को

तो दिल मेरा फिर से नए अरमान सजा लेगा

पेड़ो पर आ गयी हैं नयी पत्तियां सभी

फूल भी नए खिले हैं सावन की फुहार में

भेज देता हूँ एक प्रेम पत्र तुझको अब की बार

पढ़ते ही तुम कर देना मेरे प्यार का इकरार

सजना और संवरना भी है तुझको बस मेरे लिए

लगा दूंगा मैं गुलाब का फूल तेरी काली घनेरी जुल्फों में

तेरे हसीन चेहरे पर आज लाज शर्म की लाली है

लगता है जैसे कि आज कुछ क़यामत आने वाली है

मोहब्बत बरसा देना तुम आज मुझपर अपनी

मेरे ख्वाबों और ख्यालों का सिलसिला चलता ही रहता है

क्या कहना है और क्या सुनना अब ये किसको होश है

मेरा दिल तो तेरी चाहत में ही मदहोश है

चलता रहता हूँ तेरी तरफ ही हरदम

शायद हमारे बीच के फासले कुछ तो काम हो जाये

कर रहा हूँ मैं खुद को अब तेरे ही हवाले

कौन रखे अब हिसाब कि कितनी मोहब्बत की है

मेरे इश्क़ की गवाही अब ये दिन और रात दे रहे हैं

जिस जगह पर मैंने काटा है वक़्त तेरी याद में

वो जगह अब मेरा घर बन चुकी है

मैंने तो कभी का अपना ये दिल तुझको दे दिया

अब तेरी बारी है तूँ भी मुझको चुन

आजकल मुझको रात और दिन लगी रहती है तेरी प्रेम धुन