मेरे दिल की आवाज़ तेरी धड़कनें महसूस करती हैं
देखता हूँ मैं ख्वाब तेरे आजकल चाँद रातों में
चुरा लिया है तुमने तो दिल मेरा बातों बातों में
कल नज़रें मिली तो आज तुमसे इश्क़ हो गया

कलम मेरे हाथ में है और मैं शायर बन गया
शायरी सिखा दी तुम्हारी इन नज़रों ने
तुम्हारी नज़रें हर वक़्त मेरे आसपास रहती हैं
जब कभी तन्हा होता हूँ तो मुझसे कुछ कहती हैं
मुझ पर आजकल तेरे ही इश्क़ का छाया खुमार है

ज़ुबाँ है खामोश मेरी और दिल ये बेक़रार है
क्या तुम भी मेरी तरह यूँ ही बेकरार रहती हो
कहीं ऐसा तो नहीं मेरी ये मोहब्बत एकतरफ़ा हो
कभी तो खुलकर तुम भी इज़हार ए मोहब्बत कर दो
मेरे दिल की आवाज़ तेरी धड़कनें महसूस करती हैं
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