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मेरे मेहबूब मैं तेरे इश्क़ में कहीं हद से ना गुज़र जाऊँ

मेरे मेहबूब मैं तेरे इश्क़ में कहीं हद से ना गुज़र जाऊँ

जब से तुझे देखा हैं मेरे दिल को कहीं आराम नहीं मिलता

तेरी इन मस्त निगाहों ने एक जादू सा कर डाला है मुझपर

दीवाना होकर ढूँढ़ता हूँ तुझको मैं गली गली

क्या तुम भी कभी घर से निकलोगे मेरी खातिर

मेरे नाम की मेहँदी को तेरे हाथों का इंतज़ार है

बनोगे जिस दिन तुम मेरे सितारों से सजा आसमान होगा

झिलमिल करते हुए सितारे तेरे दामन को रोशन कर देंगे

शहनाई हमारे मिलन की गूँजेगी चारों ओर

बहारें मेरे मेहबूब के कदम चूम लेंगी

भँवरे हर कली से मिलकर हमारी कहानी कहेंगे

तेरी आँखें झील से भी गहरी नज़र आती हैं

हाथों में तेरे मेरी तक़दीर को ढूँढ़ता हूँ

तेरी ओर मुड़ जाते हैं मेरे कदम मैं चाहे जिधर जाऊँ

मेरे मेहबूब मैं तेरे इश्क़ में कहीं हद से ना गुज़र जाऊँ