तेरे गोरे गोरे गालों पर जो काला तिल है इसी पर आया मेरा दिल है
ओ हसीना चली हो कहाँ मुझे यूँ अकेला छोड़ कर तुम
तेरा मेरा साथ तो है उम्र भर के लिए
ना दिखाओ अब इतने भी नखरे हम तो तेरे आशिक़ हैं
अगर आशिक़ ही ना रहेंगे तो फिर इस हुसन को कौन देखेगा

बिना मोहब्बत के जीना तेरे लिए भी एक सजा होगा
ना जाने कितने बरस तेरी राह देखी है मैंने
अगर तूँ मुझे मिल जाये तो ज़िन्दगी में मेरी फिर से बहार आ जाये
तेरे हर अफ़साने को मैंने अपना बनाया है हमेशा
ये सोच कर कि तुम मुझे अपनी बाहों का सहारा दोगी
तेरी हर अदा पर हमने लिखी है शायरी भी
लोग देखते हैं आज मुझको तेरे नाम से जोड़कर

तेरे पास मेरा दिल है ज़रा संभाल कर रखना इसको
ये दर्द ऐ जुदाई का आलम ना जाने कब ख़तम होगा
तेरे बिना जीना तो कसम से अब एक सितम होगा
अपनी नज़रों का निशाना मुझे ना बनाओ ये बड़ी कातिल हैं
तेरे गोरे गोरे गालों पर जो काला तिल है इसी पर आया मेरा दिल है
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