दिल आज कुछ बेसहारा सा है

Posted by

दिल आज कुछ बेसहारा सा है

दिल आज कुछ बेसहारा सा है आकर कुछ सहारा दे दो

मझदार में मेरी नाव फंस सी गयी है

आकर तुम इसको फिर से किनारा दे दो

जब ये नाव चली थी समंदर में तो

ऐसा लगता था की बस अब तो मंज़िल पास ही है

बीच लहरों में आये तो फँस के ही रह गए

रूह मेरी बेचैन है बहुत और दिल उदास है

अब न तो कोई उम्मीद है और न कोई आस है

चले आओ की अब दिल मेरा कहीं लगता ही नहीं

चारो तरफ गम है तन्हाई है

और पहले से भी ज्यादा तेरी याद आयी है

याद तो आ गयी पर तुम कब आओगे

चले आओ जल्दी मेरे दिल ने तुम्हे पुकारा सा है

मेरा दिल आज कुछ बेसहारा सा है