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बेवफ़ा होने की वज़ह सब की अपनी अपनी होती है

बेवफ़ा होने की वज़ह सब की अपनी अपनी होती है

कुछ लोग आप से मिल कर आप को बर्बाद कर देते हैं

आप से मिलना उनके लिए एक मज़ाक ही होता है

ऐसे लोग खेलते हैं आप के दिल से और मज़ा लेते हैं

बच के रहना ऐसी भोली सूरत वालों से

पहले तो ये हमदर्द बनके आप का हर राज़ जान लेते हैं

और फिर जब आप को इनकी आदत सी हो जाती है

तो ये आप से अपना पल्ला झाड़ लेते हैं

पता नहीं क्यूँ फिर भी लोग इश्क़ करतें हैं

इश्क़ और अश्क़ दोनों का बड़ा गहरा रिश्ता है

कभी ख़ुशी तो कभी गम भी मिलता हैं

अगर तुझमें गम को सहने की हिम्मत हैं तो कदम बढ़ाना

ये इश्क़ की गलियां हैं और रस्ते बड़े ही मुश्किल भरे हैं

हो सकता है इन राहों में दिल भी टूटे तुम्हारा

फिर मत कहना कि किसी ने नहीं बताया क्यूँकि

बेवफ़ा होने की वज़ह सब की अपनी अपनी होती है