सावन की इस पहली बरसात में हम फिर से अकेले हैं

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सावन की इस पहली बरसात में हम फिर से अकेले हैं

ये बारिश की बूंदे मुझे फिर से बेक़रार कर रही है

मुझे याद है जब हम एक ही छतरी में एक दूजे के साथ थे

दिल से दिल मिल गए थे और हाथों में एक दूजे के हाथ थे

पर आज की ये बारिश पहले से बहुत ही अलग है

बारिश की बूंदे आग बन कर बरस रहीं है मेरे दिल पर

वजह है कि तुम आज मेरे साथ नहीं हो

फूल और पत्ते हमारी कहानी को बयान कर रहे हैं

इस बार भवरें नहीं नजर आ रहे इस सुहाने मौसम में

वो मोर जो हर बार खुश होकर नाचता था

आज शायद कहीं दूर जाकर छिप गया है

कभी जो पहली बारिश में भीग जाने का मन करता था

आज हम अकेले ही छाता लेकर निकले है

ढूँढ रहीं हैं मेरी नज़रे तुम्हे शायद कहीं पर मिल जाओ

लूट गयी मेरी हसरते और हर तरफ ग़म के मेले हैं

सावन की इस पहली बरसात में हम फिर से अकेले हैं