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ज़िन्दगी के सफ़र में जो हम से बिछड़ जाते है वो फिर नहीं आते

ज़िन्दगी के सफ़र में जो हम से बिछड़ जाते है वो फिर नहीं आते

हम चाहे लाख कोशिश कर लें हम उनको नहीं मना पाते

वैसे भी किसी ने ये बात बिलकुल सच ही कही है

कि रूठे रब को तो हम इबादत करके मना सकते है

पर रूठे हुए यार को मनाना तो बहुत मुश्क़िल है

कल ही की तो बात थी कि गुजरता था उनका वक़्त मेरी बाहों में

पर आज अचानक से वो मेरे लिए अजनबी से हो गए हैं

अगर ग़लतफहमी हो तो मैं बात करके दूर कर लूँगा

लेकिन इस बेरुख़ी का मैं क्या करूँ मैं नहीं जानता

खैर ख़ुदा तुझे हर हाल में खुश रखे आबाद रखे

हर वक़्त मैं तो दुआ करता हूँ सलामती की तेरी

भले ही आज बेवफा हो पर महबूबा हो मेरी

मैंने तो मेरी जान तुमसे सच्चा प्यार ही किया है

अब तुम ही कहो कि इसमें मेरी क्या ख़ता है

पतझड़ में जो पत्ते पेड़ो से गिर जाते हैं वो फिर नहीं आते

ज़िन्दगी के सफ़र में जो हम से बिछड़ जाते है वो फिर नहीं आते