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ये ज़िन्दगी है एक हसीन सफर और मैं तो बस एक मुसाफ़िर हूँ यारों

ये ज़िन्दगी है एक हसीन सफर और मैं तो बस एक मुसाफ़िर हूँ यारों

कभी यहाँ तो कभी वहाँ और ना जाने कहाँ कहाँ पर मैंने किया है गुजारा

कभी तो कटा है वक़्त मुफ़लिसी में तो कभी कुछ देर आराम भी मिला है

लोग आते रहे और जाते रहे मेरी ज़िन्दगी में कदम कदम पर

बहुत से ऐसे हैं जो दिल में बस गए तो कुछ ऐसे भी जो दिल से उतर गए

नहीं करता में कोई भी गिला शिकवा कभी भी किसी से

ये ज़िन्दगी दूसरों के भरोसे नहीं बल्कि अपने दम पर ही जीनी है

गुमनामी के ये काले घने बादल भी छट जायेंगे कभी

मुझे है इंतज़ार और ऐतबार कि एक दिन बहार भी लोट के आएगी

आते जाते इन खूबसूरत और आवारा रास्तों पर हक़ है हमारा

हम कभी इन पर दिन में तो कभी दिन रात चलते हैं

जब कभी हो जाती है मुलाकात कुछ मेरे जैसे दीवानों से

तो सफर की थकान मिट जाती है और तरो ताज़ा हो जाते हैं हम

मैंने छोड़ दिया है घर बार और अब तो ये सफर ही मेरी मंज़िल है

ये ज़िन्दगी है एक हसीन सफर और मैं तो बस एक मुसाफ़िर हूँ यारों