हर घड़ी और हर कदम पर ज़िन्दगी ले रही है मेरा इम्तिहान

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हर घड़ी और हर कदम पर ज़िन्दगी ले रही है मेरा इम्तिहान

कभी उतर तो कभी चढ़ाव का अनुभव हो रहा है

किताबें जो भी पढ़ी थी अब तक उनसे ही सीखा था

अब ज़िन्दगी सीखा रही है मुझको एक नया सबक हर रोज़

ये जो बचपन था धीरे से चला गया मुझे जवानी की दहलीज़ पर छोड़ कर

अब सभी मुझसे कहते हैं कि तुम बड़े हो गए हो

फैसले तो लेता ही रहा हूँ मैं जब भी ज़रूरत पड़ी

कुछ गलत भी थे तो कुछ सही साबित हुए

सही गलत को पीछे छोड़ कर मैं वक़्त के साथ आगे बढ़ता गया

किसी ने कभी मुझे ना तो तो कभी टोका और ना ही रोका

ज़िन्दगी के सफर पर जहाँ भी थक गया वहीं पर कुछ देर ठहर गया

आगे की मंज़िल की तरफ कदम बढ़ाते हुए फिर से चल पड़ा

ये जो चलना और ठहरना है यही तो मुसाफिर की पहचान है

लोग पूछते है कि क्या किया है अब तक तुमने हांसिल

तो मैं बस यही कहता हूँ कि ये सब हिसाब करना नहीं आता मुझे

मैं अभी क्या बताऊँ कि और किस मोड़ से गुजरना है मुझे

पर एक बात तो पक्की है कि एक दिन मेरी मंज़िल मुझे ज़रूर मिलेगी

एक दिन मेरा भी एक ठिकाना होगा और बनेगा मेरा भी मकान

 हर घड़ी और हर कदम पर ज़िन्दगी ले रही है मेरा इम्तिहान