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ओ दूर के मुसाफ़िर कुछ देर तो ठहर जा आज यहाँ पर

ओ दूर के मुसाफ़िर कुछ देर तो ठहर जा आज यहाँ पर

कब से चल रहा है तूँ यूँ ही लगातार दिन रात इस राह पर

चलते चलते तुझे थकान तो हो रही होगी शायद

कुछ देर ठहर कर आराम कर ले यहाँ पर

कुछ हुसन के जलवे बिखरे हैं उनका दीदार कर ले

अगर हो सके तो किसी से आँखें चार कर ले

बन जाएगी तेरी भी कुछ कहानी यहाँ पर

याद रखेगा तूँ ये मस्तानी शाम ज़िन्दगी भर

जीवन तो एक अंतहीन सफर है चलता ही रहेगा उम्र भर

कुछ वक़्त अपनी ख़ुशी के लिए भी निकाल लेना चाहिए

जब से तूँ मुसाफ़िर बना है इन उम्र से लम्बी राहों का

बस चलता ही रहा है तूँ बिना रुके बिना थके दिन रात

माना कि मंज़िल को भी पा लेगा तू एक दिन

पर ये जवानी यूँ ही बीत जाएगी और तुझे पता भी ना चलेगा

ये बात भी अगर तूँ समझ ले तो अच्छा होगा

कहीं ऐसा ना हो कि बाद में तुझे ये अफ़सोस हो

कि कुछ देर ठहर के कभी दिल को तो बहलाया ही नहीं

सफर तो बहुत तय कर लिया पर ज़िन्दगी तो कभी जिया ही नहीं

सोच मत ज़ीने का सामान सब मिलेगा तुझे आज यहाँ पर

ओ दूर के मुसाफ़िर कुछ देर तो ठहर जा आज यहाँ पर