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बैठा हूँ मायूस मैं तो नहीं हुआ मेरा कोई भी काम

बैठा हूँ मायूस मैं तो नहीं हुआ मेरा कोई भी काम

फिर ये सोचा कि कर लेता हूँ

अब मैं थोड़ा सा आराम

सोच रहा हूँ ये कि एक एक करके

मेरे सभी दोस्त कामयाब होते चले गए

पर मैं तो जहाँ खड़ा था बस वहीं हूँ

ऐ ख़ुदा क्या मेरी ये किस्मत कभी ना पलटेगी कभी

अभी तो शायद मुझे ऐसा नहीं लगता

जिस किसी काम में हाथ डालता हूँ मैं

मेरा तो वही काम बीच में ही अटक जाता है

चलते चलते रास्ते में ही मेरा मन भटक जाता है

ऐसा लगता है कि इस बेदर्द ज़माने में

मैं नहीं कमा सकूंगा अपना कोई नाम

बैठा हूँ मायूस मैं तो नहीं हुआ मेरा कोई भी काम