दिल की सुनें या ज़माने की, तुम ही बता दो मेरे महबूब

दिल की सुनें या ज़माने की, तुम ही बता दो मेरे महबूब कब से ये दिल मेरा तड़प रहा था तेरे इंतज़ार में कि फूल खिलेंगे मेरे वीरान आँगन में…

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अगर मेरी महबूबा आज मुझसे रूठी है तो कल मान भी जाएगी

अगर मेरी महबूबा आज मुझसे रूठी है तो कल मान भी जाएगी तेरे इस मायूस चेहरे पे फिर से एक प्यारी सी मुस्कान आ जाएगी चलते-चलते इस जिंदगी में सब…

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