ज़िन्दगी के रँग भी हैं कितने अजीब लोग मिलते हैं जुदा होते हैं
ज़िन्दगी के रँग भी हैं कितने अजीब लोग मिलते हैं जुदा होते हैं कभी तो मान जाते है खुद ही कभी खुद ही खफ़ा होते हैं ख़ुश रहते हैं वही…
ज़िन्दगी के रँग भी हैं कितने अजीब लोग मिलते हैं जुदा होते हैं कभी तो मान जाते है खुद ही कभी खुद ही खफ़ा होते हैं ख़ुश रहते हैं वही…
इस शहर में यूँ तो लाखों की भीड़ है पर ना जाने क्यों मैं अकेला हूँ कोई भी नहीं ऐसा जिससे मैं कर सकूँ अपने दिल की बात लोगों ने…
ये दौलत और जवानी एक दिन खो जाती है बस यादें रह जाती हैं आदमी की सारी उम्र बस यूँ ही तमाम हो जाती है बहुत से रिश्ते टूट जाते…
ना रहने को घर है ना सोने को बिस्तर है मेरी जिंदगी का यही है फ़साना आज यहाँ पर तो कल कहीं पर मेरा तो नहीं है कहीं पर कोई…
वक़्त की ये अंधी दौड़ ना जाने इंसान को कहाँ लेकर जाएगी ना दिन का पता और ना ही रात की है कोई खबर बस भाग रहे हैं लोग ना…
आज हम तेरी महफ़िल को छोड़ कर कहीं दूर चले जायेंगे ये जो शान और शौकत जिसमे तुम रहती हो मैं इसके काबिल नहीं बहुत बड़ी है तुम्हारे इन महलों…
ये सड़क पर दौड़ती हुई ज़िन्दगी ना जाने किधर जा रही है ये हुसन और ये जवानी ना जाने किधर जा रही है घर से निकल जाते है लोग सुबह…
हर घड़ी और हर कदम पर ज़िन्दगी ले रही है मेरा इम्तिहान कभी उतर तो कभी चढ़ाव का अनुभव हो रहा है किताबें जो भी पढ़ी थी अब तक उनसे…
एक बार फिर क़ोशिश करके देखता हूँ कि मैं तुझे भूल पाउँगा या नहीं पर जब भी मैंने तुमको भुलाने की क़ोशिश की है दिल से तो पहले से भी…
ज़िन्दगी के सफ़र में जो हम से बिछड़ जाते है वो फिर नहीं आते हम चाहे लाख कोशिश कर लें हम उनको नहीं मना पाते वैसे भी किसी ने ये…