MOTIVATIONAL RHYMES
Welcome to Motivational Rhymes, a place where words inspire, dreams awaken, and positivity finds a voice. Our mission is to uplift hearts and minds through the power of motivational poetry, inspirational quotes, and soulful rhymes that encourage personal growth and self-belief.


ज़िन्दगी के रँग भी हैं कितने अजीब लोग मिलते हैं जुदा होते हैं कभी तो मान जाते है खुद ही कभी खुद ही खफ़ा होते हैं ख़ुश रहते हैं वही दिल यहाँ पर जो बेवफ़ा होते हैं वफ़ा का खरीदार कोई नहीं यहाँ पर जीवन के बाजार में पागल कहते हैं लोग उनको जो वफ़ा…

इस शहर में यूँ तो लाखों की भीड़ है पर ना जाने क्यों मैं अकेला हूँ कोई भी नहीं ऐसा जिससे मैं कर सकूँ अपने दिल की बात लोगों ने हमेशा से ही मेरे दिल के जज्बातों से खेला है ना जाने क्या ढूंढ रही है मेरी नज़रे इस अनजाने से नगर में रोज़ी रोटी…

ये दौलत और जवानी एक दिन खो जाती है बस यादें रह जाती हैं आदमी की सारी उम्र बस यूँ ही तमाम हो जाती है बहुत से रिश्ते टूट जाते हैं तो कुछ कहानी बन जाती है बचपन से जब शुरू होता है ये जिंदगी का सफर तो बहुत ही प्यारा और मासूम होता है…

ना रहने को घर है ना सोने को बिस्तर है मेरी जिंदगी का यही है फ़साना आज यहाँ पर तो कल कहीं पर मेरा तो नहीं है कहीं पर कोई ठिकाना जो कह कर गए थे कि मिलते हैं वो आज तक लोट कर नहीं आये ज़िन्दगी गुजर रही थी ख्यालों में ही और साथ…

वक़्त की ये अंधी दौड़ ना जाने इंसान को कहाँ लेकर जाएगी ना दिन का पता और ना ही रात की है कोई खबर बस भाग रहे हैं लोग ना जाने किस मंज़िल की तलाश में आँखें हैं सब की सूनी सूनी सी आजकल ना जाने क्यों सपनों की खातिर वो अपनों को पीछे छोड़…

आज हम तेरी महफ़िल को छोड़ कर कहीं दूर चले जायेंगे ये जो शान और शौकत जिसमे तुम रहती हो मैं इसके काबिल नहीं बहुत बड़ी है तुम्हारे इन महलों की दीवारें शायद हमारे इश्क़ से भी ऊँची मेरी मासूम मोहब्बत इन दीवारों के पीछे कहीं क़ैद होकर रह गयी है जब कभी मोहब्बत में…

ये सड़क पर दौड़ती हुई ज़िन्दगी ना जाने किधर जा रही है ये हुसन और ये जवानी ना जाने किधर जा रही है घर से निकल जाते है लोग सुबह होते ही अपने काम की तलाश में कुछ शाम को मायूस लौटते है तो कुछ की आँखों में चमक होती है घर कैसे चलेगा बस…

हर घड़ी और हर कदम पर ज़िन्दगी ले रही है मेरा इम्तिहान कभी उतर तो कभी चढ़ाव का अनुभव हो रहा है किताबें जो भी पढ़ी थी अब तक उनसे ही सीखा था अब ज़िन्दगी सीखा रही है मुझको एक नया सबक हर रोज़ ये जो बचपन था धीरे से चला गया मुझे जवानी की…

एक बार फिर क़ोशिश करके देखता हूँ कि मैं तुझे भूल पाउँगा या नहीं पर जब भी मैंने तुमको भुलाने की क़ोशिश की है दिल से तो पहले से भी ज्यादा तेरी याद आयी है मेरे महबूब चाँद, सितारे, नदियाँ और पर्वत सभी मेरे प्यार के गवाह हैं मैंने तुझे ढूंढने की ख़ातिर पूरी कायनात…

ज़िन्दगी के सफ़र में जो हम से बिछड़ जाते है वो फिर नहीं आते हम चाहे लाख कोशिश कर लें हम उनको नहीं मना पाते वैसे भी किसी ने ये बात बिलकुल सच ही कही है कि रूठे रब को तो हम इबादत करके मना सकते है पर रूठे हुए यार को मनाना तो बहुत…