MOTIVATIONAL RHYMES
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कैसे तुझसे दिल ना लगाए कोई तेरे जैसा हसीन नहीं दूसरा कोई मैं तो चला था ये सोचकर तेरी तरफ कि तुम आगे बढ़कर मुझे थाम लोगी कदम मेरे डगमगा गए थे बस तेरे ही भरोसे पर उम्मीद थी हमारी कि तुम मेरे हो जाओगे गुलाब का फूल मेरे हाथ में ना जाने कब से…

तुझे देखा तो ये जाना है मैंने कि कैसे दो दिल मिल कर एक हो जाते हैं तेरी राहों में बिखरे हैं हज़ारों फूल ये कलियाँ भी तुझसे मिलने को बेकरार हैं इस चाँद से चेहरे की नज़ाकत क्या कहिये दो नैनों की चमक सितारों से बढ़कर है किस्मत है मेरी या फिर ये एक…

हमको तो बस तुमसे ही प्यार है तेरी ही चाहत में ये दिल मेरा बेकरार है कभी पास आते हो तुम तो कभी दूर चले जाते हो मुझसे ऐसा कब तक चलेगा ये बता दो तुम अब कटते नहीं हैं मेरे ये रात और दिन दिल मेरा तड़पता रहता है तुझसे मिलने को ना जाने…

हो सनम ऐसा कि जिस पर दिल ये मेरा कुर्बान हो जाए मेरे सनम की एक नज़र पे ही जान मेरी ये निसार हो जाए हर पल रहती है मेरे दिल में उनकी याद कुछ इस तरह से कि हर क़दम पर वो मेरे साथ साथ चलते हैं इन्ही का इश्क़ मेरी इन धड़कनों में…

यूँ तो सारा ज़माना ही हसीनों का दीवाना है तेरा दिल जो कहीं लग गया है तो क्या हुआ ये जवानी तो बस चार दिन की है यारों अगर तुझसे कोई खता हो जाये तो घबराना मत इश्क़ की दास्तान बड़ी ही हसीन होती है करवटें बदलते रहना रात भर लाज़मी है दिन जुदाई के…

ये मेरा दिल आज से तेरा हो गया है पर क्या तुम ये दिल मेरा संभाल पाओगे इस दिल में बहुत कुछ ऐसा है जो रहस्यमयी है आसमान से टूटते हुए तारे मैंने छिपा रखें हैं चाँद की चाँदनी भी है क़ैद मेरे सीने में समंदर की लहरों जैसे टकराते हैं जज्बात मुझसे अगर तुम…

करूँगा आज मैं दिल की बातें खुलकर सबके साथ नहीं छिपाऊँगा कुछ भी किसी से आज आजकल लोग खुलकर कहाँ मिलते हैं लोगों के घरों के दरवाजे रहते हैं बंद दिन में भी किसी भी मेहमान के लिए आना नहीं है मुमकिन ना ही कोई गुजार सकता है कुछ पल किसी के यहाँ कितना मसरूफ़…

तुम आओ मेरे रूबरू मेरे महबूब तो मेरी बात बने इस दिल का आज है बस तकाजा यही ज़िंदगानी मेरी ना बीत जाए बस यूँ ही कि तुम रूठती ही रहो और मैं मनाता रहूं तुमको चाँद ये चेहरा कब तक छुपाते रहोगे हमसे कभी तो आओगे बाहर घर से अपने और दीदार तेरा होने…

जब वो मुस्कुराते हैं तो खिलता है चेहरा उनका गुलाब की तरह बहुत ही खूबसूरत है सनम मेरा हमदम मेरा यूँ तो कलियाँ रहती हैं बहुत सी इस चमन में जिनको मौका नहीं मिलता कभी खिलने का भँवरे उन पर नहीं मंडराते कभी ना ही पास से गुजरते हैं पर मेरी कली की तो बस…

कहना तो बहुत कुछ था उनसे पर उसे देखकर लब मेरे खामोश हो जाते हैं माँगा था जिनको दुआ में मैंने दिन रात सजदा करके जब वो सामने आये तो हम बस उनको देखते ही रह गए ऐसे लगा जैसे कि वक़्त थम गया हो मुँह से अपने हम एक लफ्ज़ भी नहीं बोल पाए…