MOTIVATIONAL RHYMES
Welcome to Motivational Rhymes, a place where words inspire, dreams awaken, and positivity finds a voice. Our mission is to uplift hearts and minds through the power of motivational poetry, inspirational quotes, and soulful rhymes that encourage personal growth and self-belief.


दिल करता है कि कहीं पर घूम कर आएं हम एक ऐसी जगह पर जहाँ पर दिल को सुकून मिले तेरी जुल्फ को आज मैं फिर से सुलझा दूँ ये जो उलझी उलझी सी जिंदगी है इसको कुछ पल का आराम दूँ छुपा कर रखा है मैंने अपने एहसास को दुनिया से पर मैं अपने…

ज़िन्दगी के रँग भी हैं कितने अजीब लोग मिलते हैं जुदा होते हैं कभी तो मान जाते है खुद ही कभी खुद ही खफ़ा होते हैं ख़ुश रहते हैं वही दिल यहाँ पर जो बेवफ़ा होते हैं वफ़ा का खरीदार कोई नहीं यहाँ पर जीवन के बाजार में पागल कहते हैं लोग उनको जो वफ़ा…

आज कुछ ऐसा इंतज़ाम हो जाये कि ये हसीन शाम दोस्तों के नाम हो जाये काफी वक़्त गुजर गया अपने यारों के साथ बैठे और बातें किये हुए आज दिल मेरा कुछ बेचैन सा है और बहुत कुछ कहना है मुझको मेरे दोस्त ही इस हाल में मेरा हाल ऐ दिल सुन सकते हैं जब…

गा लो और मुस्कुरा लो दोस्तों ये ज़िन्दगी ना मिलेगी फिर दोबारा इस छोटी सी ज़िन्दगी में तुझको करने हैं काम बड़े माना कि किसी के पास भी वक़्त नहीं कुछ पल ठहर जाने का पर कभी कभी यारों और दोस्तों से भी मिलते रहना चाहिए कुछ सुनने चाहिए नग्मे उनसे और कुछ हमें भी…

इस शहर में यूँ तो लाखों की भीड़ है पर ना जाने क्यों मैं अकेला हूँ कोई भी नहीं ऐसा जिससे मैं कर सकूँ अपने दिल की बात लोगों ने हमेशा से ही मेरे दिल के जज्बातों से खेला है ना जाने क्या ढूंढ रही है मेरी नज़रे इस अनजाने से नगर में रोज़ी रोटी…

ये दौलत और जवानी एक दिन खो जाती है बस यादें रह जाती हैं आदमी की सारी उम्र बस यूँ ही तमाम हो जाती है बहुत से रिश्ते टूट जाते हैं तो कुछ कहानी बन जाती है बचपन से जब शुरू होता है ये जिंदगी का सफर तो बहुत ही प्यारा और मासूम होता है…

ना रहने को घर है ना सोने को बिस्तर है मेरी जिंदगी का यही है फ़साना आज यहाँ पर तो कल कहीं पर मेरा तो नहीं है कहीं पर कोई ठिकाना जो कह कर गए थे कि मिलते हैं वो आज तक लोट कर नहीं आये ज़िन्दगी गुजर रही थी ख्यालों में ही और साथ…

वक़्त की ये अंधी दौड़ ना जाने इंसान को कहाँ लेकर जाएगी ना दिन का पता और ना ही रात की है कोई खबर बस भाग रहे हैं लोग ना जाने किस मंज़िल की तलाश में आँखें हैं सब की सूनी सूनी सी आजकल ना जाने क्यों सपनों की खातिर वो अपनों को पीछे छोड़…

आज हम तेरी महफ़िल को छोड़ कर कहीं दूर चले जायेंगे ये जो शान और शौकत जिसमे तुम रहती हो मैं इसके काबिल नहीं बहुत बड़ी है तुम्हारे इन महलों की दीवारें शायद हमारे इश्क़ से भी ऊँची मेरी मासूम मोहब्बत इन दीवारों के पीछे कहीं क़ैद होकर रह गयी है जब कभी मोहब्बत में…

ये सड़क पर दौड़ती हुई ज़िन्दगी ना जाने किधर जा रही है ये हुसन और ये जवानी ना जाने किधर जा रही है घर से निकल जाते है लोग सुबह होते ही अपने काम की तलाश में कुछ शाम को मायूस लौटते है तो कुछ की आँखों में चमक होती है घर कैसे चलेगा बस…