
MOTIVATIONAL RHYMES
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मैं तेरे शहर से गुज़र रहा हूँ आज फिर से एक बार ये वही शहर है जहाँ मिला था मैं तुमसे पहली बार मिली थी जब मेरी नजर तेरी नजर से तो तेरी नज़र शरमा के झुक गयी थी हमने भी ये सोचा कि शायद तुम भी चाहती हो मुझे धीरे धीरे हमारी मुलाकातों का…

चले थे हम साथ मिलकर पर आज बिछड़ गए हैं तुमने तो कहा था कि साथ है हमारा उम्र भर के लिए ढूंढ़ती हैं मेरी नज़रें पर आज ना जाने तुम कहाँ हो एक मुस्कान थी तुम्हारी जानी पहचानी सी आज वो कहीं खो गयी हैं इस वक़्त और हालात में अब तो बदले बदले…

बेवफ़ा से वफ़ा की उम्मीद करने की खता हमने की है जिसका हमने किया है बरसो तक इंतज़ार एक झलक दिखला कर वो फिर से चले गए फिर से मिलने का वादा किया है उसने हमसे देखते है अगली मुलाकात कब, कहाँ और कैसे होगी एक एक पल मेरा कटता है सदियों के जैसा यही…

याद तेरी मुझे जीने नहीं देती है जब भी मैं तन्हा होता हूँ तो मेरे आसपास तेरी जुल्फों के साये होते हैं कभी जो तुम मुस्कुरा देती हो मेरे ख़्वाबों में तो दिल मेरा कुछ देर के लिए बहल जाता है अब ना कहीं पर चैन है और ना ही सुक़ून कट रही है ये…

ऐ यार सुन ज़िन्दगी के इम्तिहान और भी बाकी हैं सुना है कि घबऱा गए हो तुम लोगों की बातों से ये वही लोग हैं जो ना चैन से जीने देते हैं और ना मरने हमारे इश्क़ का सफर दोनों ने एक साथ शुरू किया था तुम छोड़ गए मुझको और मैं फिर भी चलता…

तुम से जुदा होकर जाना है कि इश्क़ क्या होता है क्यों बन जाता है कोई आशिक़ और रात दिन रोता है कहतें हैं कि इश्क़ और मुश्क को छुपाना बड़ा मुश्क़िल है पर जुल्म ये है कि मेरा ही महबूब मेरा क़ातिल बना है तो आप ही बताओ कि किससे छुपाएँ और कहें किससे…

जज़्बात मेरे दिल के मैं उसे कभी बता ना सका पता नहीं क्या क्या इस दिल में छुपा रखा था मैंने ख्वाबों में जब भी उसको देखा तो मैं मचल गया एक अनछुए एहसास से मैं पिंघल गया आँखों आँखों में जब बात होने लगी तो जुबाँ का क्या काम कर दिया उसकी एक नज़र…

कोई अगर दिल को आवाज़ दे तो क्या करूँ दिल में मेरे नहीं है अब कोई भी अरमान मैं क्या करूँ बड़ी हसरत थी की कोई हो मेरा हमसफ़र पर शायद किस्मत को तो कुछ और ही मंज़ूर था ख़ाली हैं हाथ मेरे और मायूसी है छायी इस दिल में याद करता हूँ जब मैं…

तूँ अगर दिल से चाहे तो तेरे हालात बदल सकते हैं ये जो आज घना अँधेरा है तेरे जीवन में कभी ये जगमगा भी सकता है रौशनी से तुझे करना है ये कि हार नहीं माननी कभी क्या हुआ जो आज वक़्त तेरे साथ नहीं है पर याद रखना कि वक़्त को भी बदलना पड़ता…

खुद पर भरोसा कर के देख तूँ जीत जायेगा एक दिन क्या हुआ जो जीता नहीं तूँ कभी भी एक बार फिर से कोशिश कर के देख ले समंदर की लहरें करती हैं कोशिश ना जाने कितनी बार किनारे को छूने की तूँ भी करले हिम्मत और कस ले कमर शायद तेरी मंज़िल का पता…