MOTIVATIONAL RHYMES
Welcome to Motivational Rhymes, a place where words inspire, dreams awaken, and positivity finds a voice. Our mission is to uplift hearts and minds through the power of motivational poetry, inspirational quotes, and soulful rhymes that encourage personal growth and self-belief.


तक़दीर मुझे तूँ ले चल मेरे महबूब की गली में ना जाने कोई कहाँ हैं मेरे दिलबर का ठिकाना हर दिल की ख़्वाइश है उस हसीना को पाना हुसन के जलवे बिखरे पड़े हैं उनकी गलियों में ये सब नज़ारे लेने का है मज़ा उनकी ही गलियों में इश्क़ वालों का ख़ुदा तो है मेरे…

मुझे ना कभी तुम अपनी नज़र से गिराना मेरा क्या है मैं तो हूँ एक आशिक़ आवारा मगर ये सोच लेना कि तुझे क्या कहेगा ज़माना ज़माने भर की नज़रे लगी हुई हैं आज तुझ पर जब से हुआ है मेरा तुमसे दोस्ताना लाज रखना मेरी तुम मैं तेरा ही तो हूँ मेरे इन लबों…

तेरे दर पर अब हम चले आएं हैं लेकर अब हम अपने दिल की फरियाद देखते हैं कि आप की नज़र कब पड़ती है हम पर तड़प रहा था दिल मेरा बरसों से बस ऐसे में इंतज़ार है तेरे ही आने का एक झलक ही दिखाई थी आपने अब ना जाने आप कहाँ चले गए…

मेरी चाहत अभी अधूरी है इसलिए तेरा मिलना बहुत ज़रूरी है तेरा मिलना वो बस पल दो पल का हमको दीवाना कर गया था कसम से ऐसा हुआ महसूस मेरे दिल को कि जैसे हमको इश्क़ हो रहा है धीरे धीरे ये चंचल शोख अदाएं तेरी बुलाती हैं हमको हम तो खींचे चले आते हैं…

तेरी मोहब्बत अब मेरी ज़िन्दगी बन गयी है जो मांगी थी रब से वो ख़ुशी बन गयी है प्यार क्या था ये तो मुझको नहीं थी खबर तुझको देखा तो इश्क़ का सफर शुरू हो गया तुझे बिठा कर ले जाऊंगा मैं एक दिन मेरे इन दो नैनों की डोली में इंतज़ार तो शायद तुमको…

जीने के लिए मिले हैं दिन चार अब जी भी ले मेरे यार सोच रहे हो कि ये बात तो सबको पता है इसमें क्या ख़ास बात है और नया क्या है तो मैं ये कहना चाहता हूँ मेरे दोस्तों इस भागती दौड़ती ज़िन्दगी में हम जीना तो भूल ही गए जो बात थी किसी…

आखिर कब तक मैं छुपाऊंगा तुझसे अपनी चाहत को एक दिन तो दिल की बात जुबान पर आ ही जाएगी हम कोशिश तो बहुत करते हैं अपना दिल बहलाने की पर शायद दिल को हमारे आपकी ही लत लग गयी है लगता है कि लत तो ये गलत लग गयी है सुबह उठता हूँ तो…

जब दिल से तुम्हारे किसी के लिए दुआ निकले तो समझ लेना कि तुम्हे इश्क़ हो गया है आशिक़ तो मांगते हैं सबकी खैर हरदम तुम भी खा लो अब ये मोहब्बत की कसम तेरी आँखों से जब भी दिल की बात होती है लगता है जैसे कोई अफसाना तो ज़रूर बनेगा दो चार मुलाकातें…

तुम क्यों चले आते हो मेरे ख्वाबों में रोजाना क्या मैं हूँ तेरी मंज़िल और तूँ है मेरा ठिकाना जब मैं तुमसे मिलने को कहता था तुमने तो हमेशा ही इंकार किया आज शायद दिल तेरा भी बेकरार है लगता है जैसे कि तेरे दिल में भी मेरे लिए प्यार है अब तुम्हे समझ में…

अगर तुम साथ देने का वादा करो तो ज़माने को छोड़ देंगे हम बात तो बस इतनी सी है कि तुम एक नज़र देख लो हमको कब से खड़े हैं तेरी राहों में दिल अपना हम थम कर पहचानते हैं अब तो सभी लोग तुम्हारे मोहल्ले के हमको पूछते है कि यहाँ क्यों आते हो…