
MOTIVATIONAL RHYMES
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आखिर कब तक मैं छुपाऊंगा तुझसे अपनी चाहत को एक दिन तो दिल की बात जुबान पर आ ही जाएगी हम कोशिश तो बहुत करते हैं अपना दिल बहलाने की पर शायद दिल को हमारे आपकी ही लत लग गयी है लगता है कि लत तो ये गलत लग गयी है सुबह उठता हूँ तो…

जब दिल से तुम्हारे किसी के लिए दुआ निकले तो समझ लेना कि तुम्हे इश्क़ हो गया है आशिक़ तो मांगते हैं सबकी खैर हरदम तुम भी खा लो अब ये मोहब्बत की कसम तेरी आँखों से जब भी दिल की बात होती है लगता है जैसे कोई अफसाना तो ज़रूर बनेगा दो चार मुलाकातें…

तुम क्यों चले आते हो मेरे ख्वाबों में रोजाना क्या मैं हूँ तेरी मंज़िल और तूँ है मेरा ठिकाना जब मैं तुमसे मिलने को कहता था तुमने तो हमेशा ही इंकार किया आज शायद दिल तेरा भी बेकरार है लगता है जैसे कि तेरे दिल में भी मेरे लिए प्यार है अब तुम्हे समझ में…

अगर तुम साथ देने का वादा करो तो ज़माने को छोड़ देंगे हम बात तो बस इतनी सी है कि तुम एक नज़र देख लो हमको कब से खड़े हैं तेरी राहों में दिल अपना हम थम कर पहचानते हैं अब तो सभी लोग तुम्हारे मोहल्ले के हमको पूछते है कि यहाँ क्यों आते हो…

आजकल मुझको रात और दिन लगी रहती है तेरी प्रेम धुन प्रेम की बंसी मैं बजाना चाहता हूँ नदियाँ किनारे मेरा ये बेताब दिल हरदम बस तुझको ही पुकारे सुन लो मेरी बहकती साँसों की पुकार तुम कर लो चाहे थोड़ा सा ही सही प्यार तुम अगर तुम एक बार छू लो मेरी धड़कनों को…

जब भी सफर में कभी एक मुसाफिर एक हसीना से मिलता है तो फिर दोनों के बीच में चाहत का फूल ही खिलता है ये ज़िन्दगी भी तो एक सफर ही है यारों हम सब इसके मुसाफिर हैं और मंज़िल है सबकी अपनी अपनी कुछ की मंज़िल पास है तो कुछ की मंज़िल दूर है…

मेरे दिल में आज क्या है तुझे सुना दूँ तो मुझे करार आ जाये दिल में है मेरे कि मैं तुमसे मोहब्बत करता हूँ तेरी ही राहों में खड़ा हूँ दिल अपना थाम कर मेरे दिल में एक कसक सी है आजकल तेरा ये चेहरा भी लगता मुझे बहुत ही हसीन है जब भी गुजरती…

तेरी तलाश में भटकता हूँ मैं दरबदर कभी किसी राह में कभी किसी मोड़ पर पूछता हूँ मैं तेरा पता इन पागल हवाओं से बिखरी हुई है खुश्बू तेरी इन फ़िज़ाओं में मासूम है चेहरा तेरा ख़ुदा की मेहरबानी है तुझपर तुम यूँ ना हँसो तड़पने पर मेरे दिल ने मेरे तुझसे ही प्यार किया…

पिला दो अपनी मस्त आँखों से तुम आज मुझको जो भी गुजरेगी हम पर गुजरेगी तुम एक बार ज़रा अपनी नज़र से मेरी नज़र मिलाओ तो सही वैसे तो हमने मयख़ाने देखे हैं बहुत जब से होश संभाला है पर तेरे जैसा साक़ी नहीं मिल सकता ढूंढ़ने पर भी ज़माने में तेरी ये मदहोश नज़रे…

मेरी ये आँखें बस तुझे ही देखती हैं मैं देखता हूँ जिस तरफ दूर दूर तक कोई नहीं है कहीं नहीं है सिवा तेरे ये दुनिया और ये महफ़िल शायद अब मेरे किसी काम की नहीं रही तेरे बिना लगता है सब सूना सूना सा चाहे कितने भी लगे हो मेले तेरे बिना अब कैसे…